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गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009

कसूर किसका

कसूर किसका


शादी वो लड्डू है जो न खाये वो पछताये और जो खाये वो भी पछताये। इस बात की हामी भरते हुए ज्यादातर इस लड्डू का स्वाद चखते है। इसी पर अमल करते हुए अमीर ने भी शादी की। बात कुछ समय पहले की है। शादी को लेकर हर-एक के मन में उत्साह होता है, एक नई उम्मीद ओर नया खुमार होता है। उसी तरह अमीर का दिल भी बहुत खुश था। ज्यों ज्यों शादी के दिन नजदीक आ रहे थे उसके मन में अजीब तरह का संचार हो रहा था। मन खुशी से झूम रहा था, मगर साथ ही इंतजार के दिन सालों की तरह लम्बे होते जा रहे थे। अमीर ने भी शादी को लेकर अपने मन में कई तरह के ख्याली महल बना रखे थे। वह जिंदगी की इन अनमोल घड़ियों को यादगार बनाना चाहता था, मगर इंसान के सोचने से क्या होता है होता तो हमेशा से वही है जो मंजूरे खुदा होता है। इसी तरह उसकी जिंदगी के इस अजीमुश््शान मौके पर एक अजीब घटना घटी जो उसके दिल पर हमेशा के लिए नक्श हो गई। वक्त ने उस शूल के घाव को भर तो दिया मगर उसका निशान ताजिन्दगी के लिए बन गया।
समय की सुंई को कोई रोक नहीं पाता है, वो अनवरत आगे बढ़ती रहती है उसी तरह आखिर इंतजार की घड़िया खत्म हुई और शादी का दिन आ ही गया। नियत तारीख को बारात ससुराल पहुंची। वहां पहुंचते ही बीवी की ओर से इस्तकबालिया फोन कॉल प्राप्त हुई, उसका दिल ओर खुशी से लबरेज हो गया। सभी तैयारियों व खुशी के आलम में रात गुजरी आखिर इंतजार की काली रात भी विदा हो गई।
जिस दिन का सभी को इंतजार होता है आखिर वह दिन आ पहुंचा, जो उसकी जिंदगी में अनमोल खुशियां लेकर आई। मगर एक बदनुमा दाग उसके दिल पर छोड़ गई, जिसकी याद ताजा होने पर आज भी दिमाग घूमने लगता है।
सुबह मंगनी का प्रोग्राम था यहीं से घटना ने नया मोड ले लिया। मंगनी के लिए औरतों के साथ कुछ लडकियां भी आई थी जिनमें आफरीन भी शामिल थी जो उसकी होने वाली बीवी की खास सहेली होने के साथ-साथ कजन भी थी। आफरीन ने अमीर को मंगनी की अंगूठी पहनाई। गोद भराई में लडृडओं से भरा थाल उसकी गोद में उंडेला अभी तक अमीर का दिल खुशी से बिल्लयों कूद रहा था उसको अचानक विराम लग गया। किसी ने उसकी पीठ पर मजाक में लडडूओं से खाली हुए थाली की दो-तीन दे मारी।
उसका दिल उचट गया कि जब समाज में इस तरह की मजाक पर रोक है तो ऐसा क्यूं हुआ। यहीं से घटना यू टर्न लेती है। उसका चेहरा जो खुशी से गुलाब की तरह खिला हुआ था सूखे पत्ते की तरह मुरझा गया।
इस अनमोल घडी की सारी खुशियां काफूर हो गई। इसके बाद शादी का प्रोग्राम तो उसी तरह चल रहा था जैसे चलना चाहिए था मगर बस कमी इस बात की थी कि उसका मन चाबी से भरे खिलौने की चाबी खत्म होने पर जिस तरह वो निढाल हो जाता है उसी तरह वो भी सभी कामों को अंजाम दे रहा था। सभी काम पूरे होने के बाद विदाई से पहले दुल्हन के घर पर जब उसे विदाई भोज पर बुलाया और ससुराल वालों की ओर से दुल्हे का मुंह मीठा करवाया जा रहा था, तब उसने बदला लेने की सोची। उसके अपने साथ आए मौसी के लडके से पूछा - ßक्या तुम उस लडकी को जानते हो जिसने थाली की पीठ पर मारी थी।Þ वो बोला - ßहां मैं जानता हूं।Þ अमीर ने कहा ßजब वो आए तो मुझे बताना।Þ जब आफरीन मिठाई खिलाने आई तो कहा कि यही है। अमीर ने उसके हाथ से खाने से मना कर दिया। मगर वो एक बार फिर आई तो उसने हाथ को झटक दिया और कहा कि तुमने मेरे थाली की मारी थी, मैंने तुम्हारी मिइाई नहीं खाई हिसाब बराबर। आफरीन जो अभी तक थाली वाली घटना से अनभिक्ष थी उसका जब सभी के सामने अपमान हुआ और वो भी बिना कारण के, वो कुछ नहीं बोली। चुपचाप अंदर जाकर अपनी सहेली (अमीर की बीवी) के पास जाकर बहुत रोई।
जब विदाई की बेला आई। अपनी सहेली को अलविदा करने आफरीन गाडी तक आई। सहेली को बैठाने के बाद उसने अमीर से कहा - ßजीजाजी आपने मेरे हाथ से मिठाई क्यों नहीं खाई, मुझसे ऐसी क्या गलती हुई, मैंनें आपके थाली की नहीं मारी थी। मगर अमीर ने सोचा कि वो झूठ बोल रही है इसलिए उसने इस बार पर गौर नहीं किया। मगर इसके बाद वो वहीं रो पडी। इससे अमीर का दिल उदास हो गया, वो सोचने लगा मैंने यहां आकर किसी का दिल दुखाकर सही नहीं किया। अगर इसने थाली की मारी भी तो मजाक मै, लेकिन अब हो भी क्या सकता था। वो सोचने लगा कि वो यहां आया तो सभी का दिल जीतने के लिए था मगर पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाया। आखिर बारात ससुराल से वापस रवाना हुई।
अगले दिन अमीर अपनी बडी बहन के साथ शादी की फोटो एलबम देख रहा था जब आफरीन का फोटो आया तो उसने अपनी बहन को बताया कि कल इसी लडकी ने मेरे थाली की मारी थी इसका बदला मैंने इसके हाथ से मिठाई नहीं खाकर चुका लिया। ये बात जब उसकी बहन ने सुनी तो कहा, ßक्या कहा फिर से कहना, तेरा दिमाग खराब हो गया है। थाली की मारने वाली आफरीन नहीं थी। मैं वहीं पर मौजूद थी।
जब घटना की वास्तविकता से परदा हटा तो फिर एक नया मोड आ गया कि जब मौसी के लड़के ने सही नहीं पहचाना था तो उसे गलत क्यों बताया। अब उसे काटो तो खून नहीं। सोचा कि घटना बार-बार नया मोड क्यों लेती जा रही है। कोई ओर समय होता तो उसे जैसे तैसे सहन कर लेता, मगर ये एक अजीब समय था। एक तो ऐसे ही बीवी से पहली बार मिलन की बेला थी उसमे ऐसे ही दो अजनबी आपस में मिलते है दूसरी तरफ ये घटना घटी भी तो आफरीन के साथ जो उसकी खास थी।
आखिर उसने फिर एक नया रास्ता निकाला एक पेपर पर पूरी घटना लिखकर उससे अपनी बीवी को वाकिफ कराया। पेपर पढकर बीवी भी घटना से रूबरू हुई ओर कहा कि हकीकत में इसमें आपका कसूर नहीं है। शायद खुदा को यही मंजूर था। अगली सुबह अमीर की बीवी ने आफरीन को पूरी घटना से अवगत कराया तब उसे भी पूरी बात पता चली। अमीर ने आफरीन से गलतफहमी में हुई गलती के लिए माफी मांग ली। मगर अमीर सोच रहा था कि इसमें कसूर मौसी के लड़के का था। मगर हकीकत में माने तो यही मंजूरे खुदा था।


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गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

अनसुलझा रहस्य

अनसुलझा रहस्य

कहानी

वातावरण जब शान्त होता है, तन्हाई होती है तो अमीर का मस्तिष्क अतीत की यादों में खोने लगता है। वही घटना मस्तिष्क पर चलचित्र की भांति चलने लगती है। कक्षा नवम् में त्यागी पढ़ती थी उसी क्लास में अमीर ने एडमिशन लिया। वािर्षक परीक्षा में त्यागी व अमीर के रोल नं. पास-पास होने से परीक्षा भवन में त्यागी ने अमीर से कुछ प्रश्नों के हल पूछें। परीक्षाफल आने पर अमीर को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ व त्यागी भी उत्तीर्ण हो गई।
कक्षा दशम् में त्यागी ने अन्य बडे़ विद्यालय में प्रवेश लिया। दोनों में वर्ष-पर्यन्त कोई मुलाकात नहीं हुई। संयागवश त्यागी के छोटे भाई निर्मल ने अमीर वाले विद्यालय की कक्षा 6 में प्रवेश लिया। निर्मल व अमीर की दोस्ती हो गई जो समय के साथ प्रगाढ़ होती गई।
बन्टू, अमीर का अच्छा मित्र था। दोनों एक साथ खेलकर बड़े हुए, बन्टू अमीर की रग-रग से वाकिफ था, भलीभांति परिचित था। बन्टू यह अवश्य जानता था कि निर्मल अमीर का मित्र है लेकिन वह यह नहीं जानता था कि निर्मल त्यागी का छोटा भाई भी है। जहां बन्टू ट्यूशन के लिए जाता था वहाँ त्यागी व निर्मल भी आते थे। बन्टू ने एक दिन मजाक में ही निर्मल से कह दिया कि-`तुम्हे अमीर ने मिलने बुलाया है।´
त्यागी ने निर्मल को डांटते हुए कहा - `ऐसे वैसे लड़कों से मत मिला करो।´
बन्टू अमीर को सर से पांव तक जानता था। ये वाक्य सुनकर उससे भी रहा नहीं गया। उसने भी कहा - `आपने मेरे मित्र के बारे में ऐसा कैसे कहा, आपने मेरे मित्र में क्या खराबी देखी है ?´
यह घटना यदि बंटू तक ही सीमित रहती तो वह आज यहाँ प्रस्तुत नहीं होती। बन्टू ने जब इस घटना का उल्लेख अमीर से किया तो उसके पांवो के नीचे से जमीन खिसक गई। उसे करारा झटका लगा कि जिसके बारे में यादों के सपने देखता था उसने ही गलत समझा। उसे अपना सपना शीशे की भांति चकनाचूर होता नजर आया।
बडी बहन त्यागी की मनाही के पश्चात भी निर्मल अमीर से मिलने पहुंच गया। अमीर ने निर्मल से कहा- `जब आपकी बहन मिलने से मना करती है तो मुझ जैसे लडकों से मत मिला करो।´
समय पंख लगाकर उड़ता गया। निर्मल व अमीर की दोस्ती पर कोई फर्क नहीं पड़ा। दोनों के संबंध उत्तरोत्तर प्रगाढ़ होते गये। अमीर जब भी निर्मल को त्योंहार पर बुलाता तो वह सहर्ष आ जाता लेकिन निर्मल जब भी अमीर को बुलाता वह जाता लेकिन पुरानी घटना स्मरण आते ही कोई बहाना बनाकर मार्ग से वापस आ जाता। अमीर जब रास्ते से वापस आ जाता तो निर्मल पूछता- `वापस क्यों चले जाते हो ?´ अमीर का यही जवाब की कहीं आपकी बहन उस दिन की तरह कुछ और न कह दे। पहले अपने बहन से पूछ लेना फिर कहना। निर्मल कहता कि ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन अमीर के दिल की कसक यही थी कि वैसी ही किसी घटना से पुन: रूबरू न होना पड़े इसके लिए वह निर्मल के घर नहीं जाता। निर्मल को भी कुछ ग्लानि अनुभव होती थी।
इस तरह पांच वर्ष गुजर जाते हैं। अमीर कॉलेज में फाइनल में पहुंच जाता है। दीपावली के त्यौंहार से एक रोज पूर्व निर्मल, अमीर के घर जाकर कहता है- `कल दिवाली है, आपको घर पर आना है। आपको जीजी (त्यागी) ने बुलाया है। अब अगर नहीं आये तो आपसे मेरी यह अन्तिम मुलाकात होगी। इतना कहकर निर्मल प्रस्थान कर गया।
अगले दिन अमीर व बन्टू निर्मल के घर जाते हैं। अमीर की त्यागी से बात नहीं होती है। कुछ दिन पश्चात एक दोस्त के घर अमीर की त्यागी से मुलाकात हुई लेकिन वह उन `शब्द-बाणों´ के बारे में नहीं पूछ पाता है ं जो त्यागी ने कहे थे। आज भी जब अमीर का ध्यान अतीत पर जाता है तो वही बात मस्तिष्क में बिजली की भांति कौंधन लगती है कि त्यागी ने ऐसा क्यों कहा था। अमीर को अपने प्रश्नों का आज तक हल नहीं मिल सका। वह सोचता है क्या यह रहस्य कभी खुल पाएगा या रहस्य ही रह जाएगा ?


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